धारणाएं

Girl Bakingवैज्ञानिक साक्ष्य के बड़े निकाय ने स्पष्ट रूप से दर्शाया है कि अनेक बार लोगों द्वारा खासतौर पर सेवन की जाने वाली मात्राओं में भी, aspartame सुरक्षित है और किसी प्रतिकूल स्वास्थ्य प्रभाव से सम्बद्ध नहीं है। तथापि, वर्षों के दौरान कुछ उपभोक्ताओं में ऐसे लक्षण पाए गए हैं जिनके बारे में उनका विश्वास है कि वे aspartame से संबद्ध हैं।

FDA ने इन आरोपों की जाँच की है और निष्कर्ष निकाला है कि “ऐसे किसी संभावित लोक स्वास्थ्य खतरे का कोई तर्कसंगत सबूत ” नहीं है और “aspartame के संबंध में ऐसा लक्षणों का कोई निरंतर या अनूठा पैटर्न सूचित नहीं किया गया है जिसे इसके उपयोग के साथ अकस्मात जोड़ा जा सके।”
1984 में, रोग नियंत्रण केंद्रों (CDC) ने इन कल्पित रिपोर्टों में से 517 की समीक्षा की और कहा, “अधिकतर बताए गए लक्षणों में से ज्यादातर मामूली थे और ऐसे लक्षण हैं जो आम जनता में सामान्य हैं” और यह कि “इन पर ध्यान केंद्रित करने वाले” नैदानिक अध्ययन इन शिकायतों का मूल्यांकन करने का सर्वोत्तम तरीका होंगे।

परिणामस्वरूप, इन आरोपों पर “ध्यान केंद्रित करने वाले” असंख्य वैज्ञानिक अध्ययन प्रमुख शैक्षिक संस्थानों में विशेषज्ञ अनुसंधानकर्ताओं द्वारा किए गए। इन अध्ययनों के अधिकांश परिणामों ने दर्शाया कि aspartame सिरदर्द, दौरे, मनोदशा, संज्ञान या व्यवहार या एलर्जी संबंधी प्रतिक्रियाओं में बदलाव सहित किसी प्रतिकूल स्वास्थ्य प्रभाव से सम्बद्ध नहीं है।

aspartame की सुरक्षा के जोरदार प्रलेखों के बावजूद, aspartame मल्टीपल स्केलेरोसिस, पार्किन्सन रोग, अल्जाइमर रोग और ल्यूपस समेत असंख्य बीमारियों से सम्बद्ध है, जैसे बेबुनियाद आरोपों का इंटरनेट और संचार के माध्यम से ऐसे कुछ लोगों द्वारा फैलाया जाना जारी है जिनके पास कोई सिद्ध वैज्ञानिक या चिकित्सीय विशेषज्ञता नहीं है।

हाल ही में, अनेक सरकारों और विशेषज्ञ वैज्ञानिक समितियों ने सावधानीपूर्वक इंटरनेट आरोपों का मूल्यांकन किया और उन्हें गलत पाया जिससे aspartame की सुरक्षा को पुनः बल मिला। इसके अलावा, प्रमुख स्वास्थ्य प्राधिकारियों जैसे कि मल्टीपल स्केलेरोसिस फाउंडेशन, द नेशनल मल्टीपल स्केलेरोसिस सोसायटी, द नेशनल पार्किन्सन फाउंडेशन, इंक, द अल्जाइमर्स एसोसिएशन और ल्यूपस फाउंडेशन ऑफ अमेरिका ने इंटरनेट पर किए गए इन दावों की समीक्षा की है और निष्कर्ष भी निकाला है कि ये गलत हैं।

सिर-दर्द

क्या aspartame से सिरदर्द या माइग्रेन उत्पन्न हुआ, इसका परीक्षण करने वाले भली-भाँति निर्मित अध्ययन में, ड्यूक यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं ने उन लोगों को aspartame या प्लेसिबो की बड़ी खुराक दी जिन्हें विश्वास था कि उन्हें aspartame से सिरदर्द हुआ है। परिणामों, जो कि न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुए, ने प्रायोगिक और नियंत्रण समूहों के बीच सिरदर्द की बारंबारता, रक्तचाप या रक्त हिस्टामाइन में कोई अंतर नहीं पाया। अनुसंधानकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि aspartame इन लोगों के सिरदर्द या माइग्रेनों का कारण नहीं था।

Yogurt

भूख और वजन बढ़ना

शरीर के वज़न में बदलाव अनेक कारकों से संबंधित हैं जैसे कि आहार, व्यायाम और आनुवांशिकता। aspartame से बनाए गए उत्पाद वज़न नियंत्रित रखने में मदद कर सकते हैं क्योंकि इनमें चीनी से मीठे किए गए उत्पादों के मुकाबले कैलोरी कम होती है। असंख्य वैज्ञानिक अध्ययनों से प्राप्त अत्यधिक वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर, aspartame भूख, क्षुधा या भोजन का सेवन नहीं बढ़ाता या वजन नहीं बढ़ाता।

मनोदशा, विचार प्रक्रिया या व्यवहार में परिवर्तन

मेसेच्यूसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Massachusetts Institute of Technology – MIT), हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और येल मेडिकल स्कूल समेत अनेक प्रतिष्ठित शैक्षिक केंद्रों पर व्यवहार संबंधी विशेषज्ञों द्वारा किए गए सुव्यवस्थित वैज्ञानिक अध्ययनों ने दर्शाया है कि aspartame का स्मृति खोने समेत मनोदशा, व्यवहार या संज्ञान पर कोई प्रभाव नहीं होता।

बच्चों में व्यवहार

बड़ी मात्रा में aspartame दिए गए बच्चों के व्यवहार का मूल्यांकन करने के लिए, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेंटल हैल्थ, येल यूनिवर्सिटी मेडिकल स्कूल और वेंडरबिल्ट (Vanderbilt) यूनिवर्सिटी मेडिकल स्कूल सहित, अनेक प्रमुख संस्थानों में असंख्य वैज्ञानिक अध्ययन किए गए। इन अध्ययन के परिणामों ने दर्शाया कि aspartame लेने से बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन नहीं आता, इसमें “हाइपरएक्टिविटी” या अटेंशन डेफिसिट डिसऑर्डर (attention deficit disorder – ADD) से पीड़ित बच्चे भी शामिल थे।

एलर्जी संबंधी प्रतिक्रियाएं

हालांकि कुछ लोगों ने दावा किया है कि उन्होंने aspartame लेने से संबंधित एलर्जी संबंधी कुछ लक्षणों को अनुभव किया है लेकिन इन उपाख्यानों की पुष्टि नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हैल्थ तथा छह प्रमुख शैक्षिक चिकित्सा केंद्रों पर सावधानीपूर्वक किए गए नियंत्रित वैज्ञानिक अध्ययनों द्वारा नहीं की गई है। जिन लोगों को यकीन था कि aspartame ने उनकी एलर्जी संबंधी प्रतिक्रिया पैदा की, उन पर किए गए इन अध्ययनों के परिणाम स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि aspartame एलर्जी संबंधी प्रतिक्रियाओं से सम्बद्ध नहीं है। कुछ लोगों में विविध प्रकार के खाद्य एलर्जी संबंधी प्रतिक्रियाएं पैदा कर सकते हैं। जिन्हें भोजन से एलर्जी का संदेह हो, उन्हें बोर्ड द्वारा प्रमाणित एलर्जिस्ट जैसे किसी योग्य चिकित्सा पेशेवर से निदान और उपचार कराना चाहिए। स्वयं निदान से अधिक गंभीर चिकित्सा समस्या के उपचार में देरी हो सकती है।

मिरगी

एपिलेप्सी इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूयार्क और एपिलेप्सी फाउंडेशन ऑफ अमेरिका का कहना है कि मिरगी से ग्रस्त लोगों द्वारा aspartame का उपयोग करना सुरक्षित है। ऐसे पशुओं और लोगों जिन्हें यकीन था कि aspartame ने उनकी मिरगी पैदा की तथा मिरगी से पीड़ित बच्चों पर असंख्य वैज्ञानिक अध्ययन किए गए हैं। इन अध्ययनों के परिणामों ने दर्शाया है कि aspartame मिरगी पैदा या उसे बदतर नहीं करता।

ल्यूपस

द ल्यूपस फाउंडेशन ऑफ अमेरिका ने निष्कर्ष निकाला है कि “SLE (सिस्टेमेटिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस – systemic lupus erythematosus) के कारण या उसे बदतर करने के रूप में aspartame की सम्बद्धता का कोई विशिष्ट साक्ष्य नहीं है” और “ल्यूपस से पीड़ित लोगों को इंटरनेट या ज्ञात विश्वसनीयता का अभाव रखने वाले अन्य स्रोतों के माध्यम से प्राप्त जानकारी के आधार पर अपने चिकित्सा उपचार, आहार, व्यायाम या अन्य दिनचर्याओं में कोई परिवर्तन करने से पहले हमेशा अपने चिकित्सक के साथ विचार-विमर्श करना चाहिए।”

अल्जाइमर रोग

अल्जाइमर रोग के बारे में भ्रांतियों को दूर करते हुए, अल्जाइमर संघ ने निष्कर्ष निकाला कि aspartame और स्मृति खोने के बीच संबंध का कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है।”

पार्किन्सन रोग

जॉर्जटाउन (Georgetown) विश्वविद्यालय में किए गए वैज्ञानिक अध्ययन ने दिखाया है कि aspartame का पार्किंसन रोग (PD) पर कोई प्रभाव नहीं होता। इसके अलावा, राष्ट्रीय पार्किंसन प्रतिष्ठान, इंक ने निष्कर्ष निकाला है कि “PD का कारण अज्ञात है, PD तो aspartame की खोज से भी पहले मौजूद था, इस बात का कोई साक्ष्य नहीं है कि aspartame लेवोडोपा (Levodopa) के सोखे जाने को रोक देता है।” (लेवेडोपा PD के उपचार के लिए प्रयुक्त की जाने वाली प्रमुख दवा है।

एक्साइटोटॉक्सिन/न्यूरोटॉक्सिन

“एक्साइटोटॉक्सिन” एक ऐसा पदार्थ है जो दिमाग और स्नायु कोशिकाओं को कथित रूप से अत्यधिक उत्तेजित कर देता है। आलोचकों ने झूठे रूप से दावा किया है कि aspartame के खाने का परिणाम एस्पार्टिक एसिड के उच्च रक्त स्तर हो सकते हैं जो दिमाग तक फैल जाते हैं और स्नायु कोशिकाओं को मार डालते हैं। तथापि, व्यापक वैज्ञानिक अनुसंधान ने दर्शाया है कि किसी भी व्यक्ति के लिए अपने आहार में-भले ही लंबे समय की अवधि के लिए हो – इतना aspartame लेना संभव नहीं है जिसका परिणाम एस्पार्टिक एसिड के उच्च रक्त स्तर हों।

दृष्टि

हालांकि वैज्ञानिकों को पता है कि मेथेनॉल की अधिक मात्राएं दृष्टि पर प्रभाव डाल सकती हैं, फिर भी जब aspartame और अनेक फलों, सब्जियों एवं जूसों को पचाया जाता है तब मेथेनॉल की छोटी मात्राएं बनती हैं। वास्तव में, टमाटर जूस का एक गिलास aspartame से मीठे किए गए समान मात्रा वाले पेय पदार्थ की तुलना में छह गुना अधिक मेथेनॉल प्रदान करता है। जठर आंत संबंधी नली में aspartame के पाचन के दौरान, तब छोड़ा गया मेथेनॉल उसी प्रकार से सामान्य शरीर प्रक्रिया द्वारा आसानी से उपापचयित होता है जिस प्रकार से मेथेनॉल अन्य आहारीय स्रोतों से प्राप्त किया जाता है। असंख्य वैज्ञानिक अध्ययनों ने दर्शाया है कि aspartame से प्राप्त मेथेनॉल शरीर में एकत्रित नहीं होता और इस प्रकार हानिकारक स्तरों तक नहीं पहुँच सकता।

इंटरनेट और संचार की भ्रांत धारणाएं

कुछ लोगों द्वारा इंटरनेट और संचार के माध्यम से लगाए गए आरोप कि aspartame असंख्य रोगों से सम्बद्ध हो सकता है, विज्ञान पर आधारित नहीं हैं। इन आरोपों को “शहरी भ्रांतियाँ” कहा जाता है। एक ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (BMJ) के संपादकीय में यह निष्कर्ष भी निकाला गया है कि aspartame की ये आलोचनाएं निराधार हैं। BMJ संपादकीय में कहा गया है: “साक्ष्य aspartame और कैंसर, बाल उड़ने, विषाद, मनोभ्रंश, व्यवहार संबंधी गड़बड़ियों या वेबसाइटों पर नज़र आने वाली अन्य स्थितियों के बीच संबंध का समर्थन नहीं करते हैं। खाद्य मानक एजेंसी, यूरोपीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण और खाद्य एवं दवा प्रशासन जैसी एजेंसियों का दायित्व भोज्यपदार्थों और स्वास्थ्य के बीच संबंधों की निगरानी करना और यदि कोई तर्कसंगत संदेह उत्पन्न हो, तो अनुसंधान आरंभ करना है।”